कुरान - 13:27 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡهِ ءَايَةٞ مِّن رَّبِّهِۦۚ قُلۡ إِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِيٓ إِلَيۡهِ مَنۡ أَنَابَ

Transliteration: (Wa yaqoolul lazeena kafaroo law laaa unzila 'alaihi Aayatum mir Rabbih; qul innal laaha yudillu mai yashaa'u wa yahdeee ilaihi man anaab)

और जो लोग इनकार करते हैं वे कहते हैं, "उन पर उनके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई?" कह दीजिए, "निस्संदेह अल्लाह जिसे चाहता है भटका देता है, और जो उसकी ओर रुजू करता है (झुकता है) उसे अपने तक पहुंचने का सीधा मार्ग दिखा देता है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 27 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हिदायत और गुमराही का उसूल

जो हठधर्मी और घमंड अपनाता है, अल्लाह उसे उसकी ज़िद में भटकने देता है; परन्तु जो सच्चे दिल से तौबा करके अल्लाह की तरफ़ झुकता है (इनाबत इलल्लाह), अल्लाह उसके लिए हिदायत के दरवाज़े खोल देता है।

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