कुरान - 13:4 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَفِي ٱلۡأَرۡضِ قِطَعٞ مُّتَجَٰوِرَٰتٞ وَجَنَّـٰتٞ مِّنۡ أَعۡنَٰبٖ وَزَرۡعٞ وَنَخِيلٞ صِنۡوَانٞ وَغَيۡرُ صِنۡوَانٖ يُسۡقَىٰ بِمَآءٖ وَٰحِدٖ وَنُفَضِّلُ بَعۡضَهَا عَلَىٰ بَعۡضٖ فِي ٱلۡأُكُلِۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa fil ardi qita'um muta jaawiraatunw wa jannaatum min a'naabinw wa zar'unw wa nakheelun sinwaanunw wa ghairu sinwaaniny yusqaa bimaaa'inw waahid; wa nufaddilu ba'dahaa 'alaa ba'din fil-ukul; inna fee zaalika la aayaatil liqawminy ya'qiloon)

और धरती में विभिन्न भूखंड (टुकड़े) एक-दूसरे से मिले हुए हैं, और अंगूरों के बाग़, खेती, और खजूर के पेड़ हैं—कुछ एक ही जड़ से जुड़े हुए (गुच्छेदार) और कुछ अलग-अलग (एकल)। वे सब एक ही पानी से सींचे जाते हैं, फिर भी हम स्वाद (और रंग-रूप) में एक को दूसरे से श्रेष्ठ बनाते हैं। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियां हैं जो बुद्धि से काम लेते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 4 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] एक ही मिट्टी और पानी, मगर अनगिनत स्वाद व फल

पास-पास सटी हुई ज़मीनें, एक जैसा पानी, एक ही धूप और हवा, मगर उनमें उगने वाले फलों का स्वाद, मिठास, खटास, रंग और ख़ुशबू एक-दूसरे से सर्वथा भिन्न! यह अंधा संयोग नहीं हो सकता, बल्कि यह एक सर्वज्ञ और स्वतंत्र कर्ता (अल्लाह) की कारीगरी का जीता-जागता मोजिज़ह है।

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