कुरान - 13:7 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡهِ ءَايَةٞ مِّن رَّبِّهِۦٓۗ إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرٞۖ وَلِكُلِّ قَوۡمٍ هَادٍ

Transliteration: (Wa yaqoolul lazeena kafaroo law laaa unzila 'alaihi Aayatum mir Rabbih; innamaaa anta munzirunw wa likulli qawmin haad)

और जो लोग इनकार करते हैं वे कहते हैं, "उन पर उनके रब की ओर से कोई (मनचाही) निशानी क्यों नहीं उतारी गई?" आप तो केवल सावधान (सचेत) करने वाले हैं, और प्रत्येक क़ौम के लिए एक मार्गदर्शक (पथ-प्रदर्शक) हुआ है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 7 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नबी की ज़िम्मेदारी चमत्कार दिखाना नहीं बल्कि दावत देना है

मुश्रिकों की मांग थी कि सोने का पहाड़ बना दिया जाए या फ़रिश्ते उतर आएं। अल्लाह ने फ़रमाया कि निशानियां भेजना अल्लाह के इख़्तियार में है; रसूल की ज़िम्मेदारी केवल सच्चाई से आगाह करना और सीधे रास्ते की रहनुमाई करना है।

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