कुरान - 13:6 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبۡلَ ٱلۡحَسَنَةِ وَقَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِهِمُ ٱلۡمَثُلَٰتُۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغۡفِرَةٖ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلۡمِهِمۡۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

Transliteration: (Wa yasta'jiloonaka bis saiyi'ati qablal hasanati wa qad khalat min qablihimul masulaat; wa inna Rabbaka lazoo maghfiratil linnaasi 'alaa zulmihim wa inna Rabbaka lashadeedul 'iqaab)

और वे आपसे भलाई (रहमत) से पहले बुराई (अज़ाब) की जल्दी मचा रहे हैं, जबकि उनसे पहले भी (सज़ा की) मिसालें गुज़र चुकी हैं। और निस्संदेह आपका रब लोगों के ज़ुल्म के बावजूद उनके लिए बड़ी माफ़ी (दया) वाला है, और निःसंदेह आपके रब की पकड़ (सज़ा) भी बहुत कठोर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 6 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मुश्रिकों की अज़ाब की मांग और ढील

काफ़िर नबी ﷺ से मज़ाक उड़ाते हुए कहते थे कि अगर आप सच्चे हैं तो हम पर तुरंत अज़ाब क्यों नहीं ले आते? अल्लाह ने फ़रमाया कि पिछली क़ौमों की तबाही तुम्हारे सामने है, फिर भी अल्लाह हलीम है और बंदों के गुनाहों के बावजूद तुरंत सज़ा नहीं देता बल्कि तौबा की मोहलत देता है।

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