Transliteration: (Fa-yawma'izil laa yus'alu 'an zambiheee insunw wa laa jaann)
"मुजरिम अपने चेहरों की अलामतों से पहचाने जाएँगे [36], और पेशानी के बालों और पैरों से पकड़कर जहन्नम में झोंक दिए जाएँगे [37]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत के रोज़ मुजरिमों के चेहरे स्याह, आँखें नीली और चेहरे पर ज़िल्लत व वहशत बरप रही होगी। इसके बरअक्स मोमिनीन के चेहरे वुज़ू के नूर से चौदहवीं के चाँद की तरह चमक रहे होंगे।
अज़ाब के फ़रिश्ते मुजरिमों की पेशानी के बालों और उनके दोनों पाँवों को आपस में मोड़कर बाँध देंगे और उन्हें ज़िल्लत के साथ दहकती हुई आग में झोंक देंगे।
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