कुरान - 37:113 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

113
وَبَٰرَكۡنَا عَلَيۡهِ وَعَلَىٰٓ إِسۡحَٰقَۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحۡسِنٞ وَظَالِمٞ لِّنَفۡسِهِۦ مُبِينٞ

Transliteration: (Wa baaraknaa 'alaihi wa 'alaaa Ishaaq; wa min zurriyya tihimaa muhsinunw wa zaalimul linafsihee mubeen (section 3))

और हमने उन पर और इस्हाक़ पर बरकत नाज़िल फ़रमाई [117]; और उन दोनों की नस्ल में से कुछ नेकोकार हैं [118] और कुछ अपनी जानों पर खुला ज़ुल्म करने वाले हैं [119]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 113 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 113

"और हमने उन पर और इस्हाक़ पर बरकत नाज़िल फ़रमाई [117]; और उनकी नस्ल में कुछ नेकोकार हैं [118] और कुछ खुला ज़ुल्म करने वाले [119]!"

[117] ख़ानदान पर बरकतें

अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम और हज़रत इस्हाक़ के ख़ानदान में बेशुमार नबी और औलिया पैदा फ़रमा कर अज़ीम बरकतें अता फ़रमाईं।

[118] औलाद में सालेहीन

उनकी नस्ल में अंबिया-ए-बनी इस्राईल और नेक बंदे पैदा हुए जिन्होंने तौहीद का झंडा बुलंद रखा।

[119] नस्बी फ़ख़्र की नफ़ी

लेकिन बाज़ औलादें नाफ़रमान और काफ़िर हुईं। इससे मालूम हुआ कि महज़ किसी नबी की औलाद होना नजात के लिए काफ़ी नहीं जब तक कि अक़ीदा और अमल सही न हो।

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