कुरान - 37:154 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

154
مَا لَكُمۡ كَيۡفَ تَحۡكُمُونَ

Transliteration: (Maa lakum kaifa tahkumoon)

तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा हुक्म लगाते हो [156]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 154 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 154

"तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा हुक्म लगाते हो [156]?"

[156] बातिल फ़ैसले और अक़्ल पर मलामत

यह आयत मुबारका उन लोगों की जहालत और कज-फ़हमी पर सख्त मलामत करती है जो उल्टे-सीधे फ़ैसले करते हैं, फ़रमाया:
"ऐ नादान लोगो! तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसी बेवक़ूफ़ी भरी बातें करते हो!"

वे बेटों को बेटियों पर तरजीह देते थे और समझते थे कि बेटे नस्ल चलाने और बुढ़ापे में सहारा बनने के लिए हैं, जबकि बेटियों को हक़ीर व कमतर समझते थे।

अल्लाह तआला ने उनकी इस बातिल मंतिक़ को झंझोड़ा कि अगर अल्लाह को औलाद की हाजत होती (नौजुबिल्लाह), तो वह तुम्हारे ख़्याल के मुताबिक़ बेटों के बजाय बेटियों को क्यों मुंतख़ब फ़रमाता?

यह वाज़ेह रहे कि इस आयत का मक़सद यह नहीं कि लड़के ज़ाती तौर पर बेहतर हैं और लड़कियां बदतर, बल्कि अरब के मुशरिकीन की जाहिलाना सोच और उनके बातिल तसव्वुरात की तरदीद करना मक़सूद है।

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