Transliteration: (Afalaa tazakkaroon)
"तो क्या तुम ध्यान नहीं करते [157]?"
औलाद नस्ल को बाक़ी रखने के लिए होती है। जिसे मौत आनी है उसे औलाद और वारिस की हाजत होती है ताकि उसका नाम व काम बाक़ी रहे।
ज़रा ग़ौर करो, अगर सूरज, चाँद और सितारों के औलाद नहीं और वे सदियों से क़ायम हैं, तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त जो हय्यु व क़य्यूम और ला-फ़ानी है, उसे औलाद की क्या हाजत हो सकती है!
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