कुरान - 37:155 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

155
أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Afalaa tazakkaroon)

तो क्या तुम ध्यान नहीं करते [157]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 155 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 155

"तो क्या तुम ध्यान नहीं करते [157]?"

[157] औलाद की हाजत और तंज़ीह-ए-इलाही

औलाद नस्ल को बाक़ी रखने के लिए होती है। जिसे मौत आनी है उसे औलाद और वारिस की हाजत होती है ताकि उसका नाम व काम बाक़ी रहे।

ज़रा ग़ौर करो, अगर सूरज, चाँद और सितारों के औलाद नहीं और वे सदियों से क़ायम हैं, तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त जो हय्यु व क़य्यूम और ला-फ़ानी है, उसे औलाद की क्या हाजत हो सकती है!

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