Transliteration: (Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen)
"सिवाए अल्लाह के चुने हुए [161] (मुख़लिस) बंदों के।"
यह आयत मुबारका वाज़ेह करती है कि सिर्फ़ वही मुख़लिस और सच्चे ईमान वाले बंदे—जो ख़ालिस अल्लाह की रिज़ा के लिए इबादत करते हैं और उसकी तौहीद पर क़ायम हैं—जहन्नम के अज़ाब और मुशरिकीन की गुमराही से महफ़ूज़ रहेंगे।
अल्लाह तआला का ख़ास फ़ज़्ल व करम हमेशा अपने परहेज़गार और मुत्तक़ी बंदों पर रहता है, जिन्हें उनके इख़्लास और नेकी की बिना पर बातिल से जुदा और मुमताज़ कर दिया गया है।
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