कुरान - 37:160 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

160
إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلۡمُخۡلَصِينَ

Transliteration: (Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen)

सिवाए अल्लाह के चुने हुए [161] (मुख़लिस) बंदों के। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 160 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 160

"सिवाए अल्लाह के चुने हुए [161] (मुख़लिस) बंदों के।"

[161] मुख़लिस मोमिनीन की हिफ़ाज़त और नजात

यह आयत मुबारका वाज़ेह करती है कि सिर्फ़ वही मुख़लिस और सच्चे ईमान वाले बंदे—जो ख़ालिस अल्लाह की रिज़ा के लिए इबादत करते हैं और उसकी तौहीद पर क़ायम हैं—जहन्नम के अज़ाब और मुशरिकीन की गुमराही से महफ़ूज़ रहेंगे।

अल्लाह तआला का ख़ास फ़ज़्ल व करम हमेशा अपने परहेज़गार और मुत्तक़ी बंदों पर रहता है, जिन्हें उनके इख़्लास और नेकी की बिना पर बातिल से जुदा और मुमताज़ कर दिया गया है।

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