कुरान - 37:18 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
قُلۡ نَعَمۡ وَأَنتُمۡ دَٰخِرُونَ

Transliteration: (Qul na'am wa antum daakhiroon)

आप फ़रमा दीजिए: "हाँ! और तुम ज़लील-ओ-ख़्वार होकर (उठोगे) [21]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 18

"आप फ़रमा दीजिए: 'हाँ! और तुम ज़लील-ओ-ख़्वार होकर उठोगे [21]!'"

[21] महशर की रुसवाई काफ़िरों का मुक़द्दर

इस आयते करीमा से मालूम होता है कि क़ियामत की ज़िल्लत और रुसवाई ख़ास तौर पर काफ़िरों और मुशरिक़ों के लिए है। गुनाहगार मोमिनों को अगर सज़ा भी होगी, तो अल्लाह उन्हें महशर में काफ़िरों की तरह ज़लील-ओ-रुस्वा नहीं फ़रमाएगा।

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