Transliteration: ('A-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'a innaa lamab'oosoon)
"क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी और हड्डियां हो जाएंगे, तो क्या हम सचमुच दोबारा उठाए जाएंगे [19]?"
काफ़िरों का यह सवाल किसी तहक़ीक़ के लिए नहीं बल्कि हश्र-ओ-नश्र का मज़ाक़ उड़ाने और सिरे से इंकार करने के लिए था। अल्लाह की दी हुई ख़बर का इस अंदाज़ में इंकार करना सरीह कुफ़्र है।
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