कुरान - 37:14 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
وَإِذَا رَأَوۡاْ ءَايَةٗ يَسۡتَسۡخِرُونَ

Transliteration: (Wa izaa ra aw Aayatany yastaskhiroon)

और जब वे कोई निशानी (मोजिज़ाह) देखते हैं, तो मज़ाक़ उड़ाते हैं [17]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 14

"और जब वे कोई निशानी देखते हैं, तो मज़ाक़ उड़ाते हैं [17];"

[17] हुज़ूर ﷺ के रौशन मोजिज़ात का इस्तिहज़ा

काफ़िरों ने अपनी आंखों से चांद के दो टुकड़े होना (शक्कुल क़मर), डूबे हुए सूरज का पलट आना, और पत्थरों का कलिमा पढ़ना जैसे वाज़ेह मोजिज़ात देखे, लेकिन ईमान लाने के बजाय सरकशी में आगे बढ़ कर मज़ाक़ उड़ाने लगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now