कुरान - 37:53 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ

Transliteration: ('A-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'a innaa lamadeenoon)

क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी और हड्डियां हो जाएंगे, तो क्या हमें बदला और जज़ा-ओ-सज़ा दी जाएगी [53]?'" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 53

"'क्या जब हम मिट्टी और हड्डियां हो जाएंगे, तो क्या हमें बदला दिया जाएगा [53]?'"

[53] हिसाब और जज़ा-सज़ा का इंकार

वह काफ़िर कहता था कि हड्डियां गल जाने के बाद कौन हमें दोबारा ज़िंदा करके अदालत में खड़ा करेगा? यह सब ख़्याली बातें हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now