कुरान - 37:57 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
وَلَوۡلَا نِعۡمَةُ رَبِّي لَكُنتُ مِنَ ٱلۡمُحۡضَرِينَ

Transliteration: (Wa law laa ni'matu Rabbee lakuntu minal muhdareen)

और अगर मेरे रब का फ़ज़्ल (नेमत) न होता [57], तो यक़ीनन मैं भी (अज़ाब में) पकड़ कर हाज़िर किए जाने वालों में होता [58]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 57

"और अगर मेरे रब का फ़ज़्ल न होता [57], तो मैं भी पकड़ कर हाज़िर किए जाने वालों में होता [58]!"

[57-58] रहमते इलाही ही ईमान और नजात का ज़ामिन

मोमिन दिल की गहराइयों से अल्लाह का शुक्र अदा करेगा कि यह महज़ मेरे रब का फ़ज़्ल और तौफ़ीक़ थी जिसने मुझे ईमान पर साबित क़दम रखा, वरना मैं भी मुजरिमों के लश्कर में जहन्नम का ईंधन बना दिया जाता।

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