कुरान - 37:59 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
إِلَّا مَوۡتَتَنَا ٱلۡأُولَىٰ وَمَا نَحۡنُ بِمُعَذَّبِينَ

Transliteration: (Illa mawtatanal oola wa maa nahnu bimu'azzabeen)

सिवाए हमारी उसी पहली मौत के, और न ही हमें कोई अज़ाब दिया जाएगा [59]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 59

"सिवाए हमारी उसी पहली मौत के, और न ही हमें कोई अज़ाब दिया जाएगा [59]?"

[59] मौत का ज़बह होना और दायमी ज़िंदगी की बशारत

हज़रत इब्ने उमर और हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि जन्नत और दोज़ख़ के दरमियान मौत को मेंढे की सूरत में लाकर ज़बह कर दिया जाएगा और मुनादी पुकारेगा: "ऐ अहले जन्नत! अब हमेशा की ज़िंदगी है, मौत कभी नहीं आएगी!" यह मोमिनों की ख़ुशी और इतमीनान का मुजस्सम इज़हार है।

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