कुरान - 37:60 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ

Transliteration: (Inna haazaa lahuwal fawzul 'azeem)

बेशक यही सबसे बड़ी कामयाबी (अज़ीम फ़तह) है [60]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 60

"बेशक यही सबसे बड़ी कामयाबी है [60]!"

[60] आख़िरत की दायमी और हक़ीक़ी फ़लाह

दुनिया का माल-ओ-दौलत और आरज़ी सरदारी कोई कामयाबी नहीं। हक़ीक़ी और अज़ीम तरीन कामयाबी यह है कि इंसान जहन्नम के अज़ाब से बच जाए और अल्लाह की रज़ा व जन्नतुल फ़िरदौस की दायमी नेमतों का हक़दार बन जाए।

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