Transliteration: (Azaalika khairun nuzulan am shajaratuz Zaqqoom)
"क्या यह मेहमानी बेहतर है या ज़क़्क़ूम का दरख़्त [62, 63]?"
अहले जन्नत को जो लज़ीज़ मेवे, पाकीज़ा शराब और इज़्ज़त की रिहाइश अता होगी, वह अल्लाह तआला की तरफ़ से शाहाना और मुकर्रम मेहमानी है।
इसके मुक़ाबले में जहन्नमियों की गिज़ा "ज़क़्क़ूम" होगी — एक कांटेदार, इंतिहाई कड़वा और बदबूदार दरख़्त जो पेट में जाते ही तांबे की तरह खौलेगा। दोनों हालतों का फ़र्क़ अक़्ल रखने वालों के लिए खुली नसीहत है।
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