कुरान - 37:62 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
أَذَٰلِكَ خَيۡرٞ نُّزُلًا أَمۡ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ

Transliteration: (Azaalika khairun nuzulan am shajaratuz Zaqqoom)

क्या यह मेहमानी [62] बेहतर है या ज़क़्क़ूम (थूहर) का दरख़्त [63]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 62

"क्या यह मेहमानी बेहतर है या ज़क़्क़ूम का दरख़्त [62, 63]?"

[62] जन्नत की इज़्ज़त-अफ़ज़ाई और मेहमानी

अहले जन्नत को जो लज़ीज़ मेवे, पाकीज़ा शराब और इज़्ज़त की रिहाइश अता होगी, वह अल्लाह तआला की तरफ़ से शाहाना और मुकर्रम मेहमानी है।

[63] ज़क़्क़ूम का कड़वा और ज़हरीला दरख़्त

इसके मुक़ाबले में जहन्नमियों की गिज़ा "ज़क़्क़ूम" होगी — एक कांटेदार, इंतिहाई कड़वा और बदबूदार दरख़्त जो पेट में जाते ही तांबे की तरह खौलेगा। दोनों हालतों का फ़र्क़ अक़्ल रखने वालों के लिए खुली नसीहत है।

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