कुरान - 37:63 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
إِنَّا جَعَلۡنَٰهَا فِتۡنَةٗ لِّلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Innaa ja'alnaahaa fitnatal lizzaalimeen)

बेशक हमने उसे (ज़क़्क़ूम को) ज़ालिमों के लिए एक आज़माइश (और अज़ाब) बना दिया है [64]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 63

"बेशक हमने उसे ज़ालिमों के लिए आज़माइश बना दिया है [64]!"

[64] ज़क़्क़ूम के वजूद पर मुनकिरीन का शुबहा

जब क़ुरआने पाक ने ज़क़्क़ूम का ज़िक्र फ़रमाया, तो काफ़िर मज़ाक़ उड़ाने लगे कि आग तो दरख़्त को जला देती है, फिर जहन्नम की दहकती आग में दरख़्त कैसे उग सकता है? अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि यह ज़ालिमों की अक़्लों के लिए आज़माइश है। जो क़ादिर सब्ज़ शाख़ में आग रख सकता है, वह दहकती आग में दरख़्त को क़ायम रखने पर भी क़ादिर है।

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