कुरान - 37:64 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
إِنَّهَا شَجَرَةٞ تَخۡرُجُ فِيٓ أَصۡلِ ٱلۡجَحِيمِ

Transliteration: (Innahaa shajaratun takhruju feee aslil Jaheem)

बेशक वह एक ऐसा दरख़्त है जो जहन्नम की तह (गहराई) से उगता है [65]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 64

"बेशक वह एक ऐसा दरख़्त है जो जहन्नम की तह से उगता है [65];"

[65] क़अर-ए-जहन्नम से ज़क़्क़ूम का फैलाव

ज़क़्क़ूम की जड़ें जहन्नम के सब से निचले तबक़े (क़अर-ए-जहन्नम) में हैं और उसकी कांटेदार शाख़ें जहन्नम के तमाम हिस्सों में फैली हुई हैं, जहाँ दोज़ख़ियों को इसी दरख़्त का खाना खाने पर मजबूर किया जाएगा।

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