Transliteration: (Iz qaala li abeehi wa qawmihee maazaa ta'budoon)
"जब उन्होंने अपने बाप और अपनी क़ौम से फ़रमाया [85]: 'तुम किसकी इबादत करते हो?'"
यहाँ "बाप" से मुराद चाचा आज़र है, जैसा कि अक्सर मुफ़स्सिरीन ने फ़रमाया। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के हक़ीक़ी वालिद का नाम तारुख़ था जो मोमिन और मुवहिद थे (तफ़सीलात के लिए तफ़सीर-ए-नईमी मुलाहिज़ा फ़रमाएं)।
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को बे-जान पत्थरों की पूजा पर फटकारा कि दीन के मामले में किसी क़राबतदारी या रस्म-ओ-रिवाज की कोई गुंजाइश नहीं। हक़ीक़ी रिश्ता सिर्फ़ ईमान और इस्लाम का है।
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