Transliteration: (Wa maaa as'alukum 'alaihi min ajrin in ajriya illaa 'alaa Rabbil 'aalameen)
"और मैं इस पर तुमसे कोई बदला नहीं मांगता; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [112];"
अंबियाए किराम की दावत का तग़र्रा यह है कि वे अपनी तबलीग़ व हिदायत के बदले दुनिया की कोई दौलत, ओहदा या खिदमत तलब नहीं करते। उनका मक़सद सिर्फ़ रज़ाए इलाही होता है और उनका अज्र व सवाब अल्लाह तआला के करम पर मौक़ूफ़ होता है। इससे साबित होता है कि पैग़ाम में ज़रा भी दुनियावी ग़रज़ शामिल नहीं थी।
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