कुरान - 26:109 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

109
وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maaa as'alukum 'alaihi min ajrin in ajriya illaa 'alaa Rabbil 'aalameen)

और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत (बदला) नहीं मांगता; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [112]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 109 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 109

"और मैं इस पर तुमसे कोई बदला नहीं मांगता; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [112];"

[112] तबलीग़-ए-दीन में बे-ग़रज़ी और ख़ुलूस

अंबियाए किराम की दावत का तग़र्रा यह है कि वे अपनी तबलीग़ व हिदायत के बदले दुनिया की कोई दौलत, ओहदा या खिदमत तलब नहीं करते। उनका मक़सद सिर्फ़ रज़ाए इलाही होता है और उनका अज्र व सवाब अल्लाह तआला के करम पर मौक़ूफ़ होता है। इससे साबित होता है कि पैग़ाम में ज़रा भी दुनियावी ग़रज़ शामिल नहीं थी।

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