Transliteration: (Qaalooo anu'minu laka wattaba 'akal arzaloon)
"वे बोले, 'क्या हम तुम पर ईमान ले आएं जबकि तुम्हारी पैरवी कमज़ोर लोगों ने की है [113]?'"
क़ौम-ए-नूह के दौलतमंद और मगरूर सरदारों ने ईमान लाने से इंकार करते हुए यह बेहुदा ऐतराज़ उठाया कि तुम्हारे साथ तो ग़रीब, मिस्कीन, मज़दूर और कमज़ोर लोग बैठे हैं, हम अशराफ़ व रईस होकर इन हक़ीर लोगों के बराबर कैसे बैठ सकते हैं? तकब्बुर और तबक़ाती इम्तियाज़ हमेशा से हक़ के क़बूल करने में सबसे बड़ी रुकावट रहा है।
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