कुरान - 26:126 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

126
فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ

Transliteration: (Fattaqullaaha wa atee'oon)

पस अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो [127]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 126 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 126

"पस अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो [127];"

[127] तक़वा और इताअत-ए-रसूल ही निजात की ज़मानत

हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने अपनी दावत का निचोड़ बयान फ़रमाया कि दिल में ख़ुदा का ख़ौफ़ पैदा करो और अपनी अमली ज़िन्दगी में मेरी पैरवी करो, क्योंकि रसूल की इताअत के बग़ैर अल्लाह की बन्दगी मुम्किन नहीं।

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