Transliteration: (Atabnoona bikulli ree'in aayatan ta'basoon)
"क्या तुम हर बुलन्द टीले पर एक यादगार इमारत बेमक़सद बनाते हो [130]?"
क़ौम-ए-आद के लोग बहुत क़वी-हैकेल और ताक़तवर थे। वे रास्तों और ऊंची पहाड़ियों पर सिर्फ़ अपनी शानो-शौकत दिखाने, मुसाफ़िरों का मज़ाक़ उड़ाने और फ़िज़ूल खेल-तमाशे के लिए ऊंची-ऊंची यादगारें और बुर्ज बनाते थे जिनका कोई दीनी या दुनियावी मक़सद न था। हज़रत हूद ने इस बेमक़सद इसराफ़ और तकब्बुर पर उन्हें टोका।
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