कुरान - 26:128 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

128
أَتَبۡنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ ءَايَةٗ تَعۡبَثُونَ

Transliteration: (Atabnoona bikulli ree'in aayatan ta'basoon)

क्या तुम हर बुलन्द टीले (पहाड़ी) पर एक यादगार इमारत बेमक़सद (फ़िज़ूल और खेल-तमाशे के तौर पर) बनाते हो [130]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 128 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 128

"क्या तुम हर बुलन्द टीले पर एक यादगार इमारत बेमक़सद बनाते हो [130]?"

[130] बुलन्द टीलों पर फ़िज़ूल और नुमाइशी इमारतें

क़ौम-ए-आद के लोग बहुत क़वी-हैकेल और ताक़तवर थे। वे रास्तों और ऊंची पहाड़ियों पर सिर्फ़ अपनी शानो-शौकत दिखाने, मुसाफ़िरों का मज़ाक़ उड़ाने और फ़िज़ूल खेल-तमाशे के लिए ऊंची-ऊंची यादगारें और बुर्ज बनाते थे जिनका कोई दीनी या दुनियावी मक़सद न था। हज़रत हूद ने इस बेमक़सद इसराफ़ और तकब्बुर पर उन्हें टोका।

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