Transliteration: (Wa izaa batashtum batashtum jabbaareen)
"और जब तुम हाथ डालते हो, तो निहायत जब्बार बनकर पकड़ते हो [132]!"
क़ौम-ए-आद के अफ़राद अपनी जिस्मानी ताक़त के घमंड में कमज़ोरों पर ज़ुल्म ढाते थे। जब किसी से कोई मामूली ख़ता हो जाती तो वे उसे कोड़ों और पत्थरों से बेरहमी के साथ पीट-पीट कर हलाक कर देते थे। हज़रत हूद ने उनके इस ज़ालिमाना और जाबराना रवैये की सख़्त मज़म्मत फ़रमाई।
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