कुरान - 26:130 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

130
وَإِذَا بَطَشۡتُم بَطَشۡتُمۡ جَبَّارِينَ

Transliteration: (Wa izaa batashtum batashtum jabbaareen)

और जब तुम (किसी पर) हाथ डालते हो, तो निहायत ज़ालिम और बेरहम (जब्बार) बनकर पकड़ते हो [132]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 130 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 130

"और जब तुम हाथ डालते हो, तो निहायत जब्बार बनकर पकड़ते हो [132]!"

[132] क़ौम-ए-आद का ज़ुल्म, तशद्दुद और बेरहमी

क़ौम-ए-आद के अफ़राद अपनी जिस्मानी ताक़त के घमंड में कमज़ोरों पर ज़ुल्म ढाते थे। जब किसी से कोई मामूली ख़ता हो जाती तो वे उसे कोड़ों और पत्थरों से बेरहमी के साथ पीट-पीट कर हलाक कर देते थे। हज़रत हूद ने उनके इस ज़ालिमाना और जाबराना रवैये की सख़्त मज़म्मत फ़रमाई।

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