कुरान - 26:129 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

129
وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمۡ تَخۡلُدُونَ

Transliteration: (Wa tattakhizoona masaani'a la'allakum takhludoon)

और तुम ऐसे मज़बूत क़िले और महल बनाते हो गोया तुम्हें हमेशा (यहीं दुनिया में) ज़िन्दा रहना है [131]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 129 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 129

"और तुम ऐसे मज़बूत क़िले और महल बनाते हो गोया तुम्हें हमेशा ज़िन्दा रहना है [131]!"

[131] दुनिया की हमेशगी का धोका और तूल-ए-अमल

वे पत्थरों को तराश कर ऐसे सख़्त महल, हवेलियां और पानी के हौज़ (मसानिया) बनाते थे जैसे उन्हें कभी मौत नहीं आएगी और वे दुनिया में हमेशा रहेंगे। हज़रत हूद ने फ़रमाया कि दुनिया फ़ानी है और मौत यक़ीनी, इसलिए इस मुसाफ़िर-ख़ाने में हमेशा रहने की उम्मीद बांधना सख़्त नादानी है।

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