कुरान - 26:127 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

127
وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maa as'alukum 'alaihi min ajrin in ajriya illaa 'alaa Rabbil 'aalameen)

और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता [128]; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [129]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 127 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 127

"और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता [128]; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [129];"

[128] दुनियावी मुआविज़े से बे-नियाज़ी

अंबियाए किराम अपनी तबलीग़ और ख़िदमत के बदले लोगों से माल, दौलत या सरदारी की कोई तमन्ना नहीं रखते। वे पूरी तरह बे-लौस होकर ख़ालिक़ की रज़ा के लिए मख़लूक़ की रहनुमाई करते हैं।

[129] रब्बुल आलमीन की बारगाह से अज्र की उम्मीद

हज़रत हूद ने वाज़ेह फ़रमाया कि मेरा बदला सिर्फ़ तमाम आलम के पालने वाले रब के ज़िम्मे है जो मेरी मेहनत और ख़ुलूस को ख़ूब जानता है और वही मुझे बेहतरीन जज़ा अता फ़रमाएगा।

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