कुरान - 26:13 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَيَضِيقُ صَدۡرِي وَلَا يَنطَلِقُ لِسَانِي فَأَرۡسِلۡ إِلَىٰ هَٰرُونَ

Transliteration: (Wa yadeequ sadree wa laa yantaliqu lisaanee fa arsil ilaa Haaroon)

और मेरा सीना तंग होता है [15] और मेरी ज़बान (तेज़ी से) नहीं चलती, पस हारून की तरफ़ भी (वह्य का) पैग़ाम भेज दीजिए [16]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 13

"और मेरा सीना तंग होता है [15] और ज़बान नहीं चलती, पस हारून की तरफ़ वह्य भेज दीजिए [16];"

[15] हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का ज़बान और सीने का उज़्र

बचपन में जलता हुआ अंगारा मुंह में रख लेने की वजह से हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की ज़बान-ए-मुबारक में कुछ लुकनत (अटकन) थी, जिससे तेज़ गुफ़्तगू के वक़्त परेशानी होती थी और सीने में घुटन महसूस होती थी।

[16] हज़रत हारून अलैहिस्सलाम की नबुव्वत व मुआवनत की दुआ

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने दुआ की कि मेरे भाई हज़रत हारून जो इंतिहाई फ़सीहुल-बयान और शीरीं-ज़बान हैं, उन्हें भी वह्य और नबुव्वत अता फ़रमाकर मेरा मददगार बना दीजिए ताकि वे तब्लीग़ के इस अज़ीम काम में मेरा हाथ बटा सकें।

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