कुरान - 26:15 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
قَالَ كَلَّاۖ فَٱذۡهَبَا بِـَٔايَٰتِنَآۖ إِنَّا مَعَكُم مُّسۡتَمِعُونَ

Transliteration: (Qaala kallaa fazhabaa bi Aayaatinaaa innaa ma'akum mustami'oon)

अल्लाह ने फ़रमाया, 'हरगिज़ नहीं [19]! पस तुम दोनों हमारी निशानियां लेकर जाओ; बेशक हम तुम्हारे साथ (सब कुछ) सुनने वाले हैं [20]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 15

"फ़रमाया, 'हरगिज़ नहीं [19]! तुम दोनों निशानियां लेकर जाओ; बेशक हम तुम्हारे साथ सुनने वाले हैं [20]।"

[19] 'कल्ला' यानी हिफ़ाज़त-ए-इलाही की ज़मानत

अल्लाह तआला ने फ़रमाया: 'कल्ला' (हरगिज़ ऐसा नहीं होगा)! फ़िरऔन और उसके लश्कर में यह जुर्रत नहीं होगी कि वे तुम्हें छू भी सकें। हमने तुम्हारी जान की हिफ़ाज़त का ज़िम्मा ले लिया है।

[20] मोजिज़ात और माईयत-ए-इलाही

अल्लाह ने हज़रत मूसा और हज़रत हारून को असा (लाठी) और यद-ए-बैज़ा (चमकता हाथ) जैसे अज़ीम मोजिज़ात अता फ़रमाए और तसल्ली दी कि तुम बेख़ौफ़ होकर जाओ, हमारी मदद, कु़दरत और इल्म तुम्हारे साथ है, हम फ़िरऔन की हर बात सुन रहे हैं और उसे देख रहे हैं।

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