कुरान - 26:14 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
وَلَهُمۡ عَلَيَّ ذَنۢبٞ فَأَخَافُ أَن يَقۡتُلُونِ

Transliteration: (Wa lahum 'alaiya zambun fa akhaafu ai yaqtuloon)

और उनका मुझ पर (क़त्ल के) एक गुनाह का दावा भी है [17], इसलिए मुझे डर है कि वे मुझे क़त्ल कर देंगे [18]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 14

"और उनका मुझ पर एक गुनाह का दावा है [17], इसलिए डर है कि वे मुझे क़त्ल कर देंगे [18]।"

[17] क़िब्ती के ग़ैर-इरादतन क़त्ल का वाक़िया

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के मिस्र छोड़ने से पहले एक इसराईली को बचाते हुए एक क़िब्ती (फ़िरऔनी) को मुक्का मारा था जिससे वह इत्तिफ़ाक़िया मर गया था। फ़िरऔन और उसके लोग इसे क़त्ल-ए-अमद क़रार देकर हज़रत मूसा के ख़ून के प्यासे थे।

[18] तब्लीग़ से पहले क़त्ल हो जाने का अंदेशा

हज़रत मूसा को अपनी जान का ख़ौफ़ नहीं था बल्कि यह फ़िक्र थी कि पैग़ाम-ए-हक़ पहुंचाने से पहले ही कहीं वे मुझे क़त्ल न कर दें और तब्लीग़ का काम अधूरा न रह जाए।

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