Transliteration: (Wa lahum 'alaiya zambun fa akhaafu ai yaqtuloon)
"और उनका मुझ पर एक गुनाह का दावा है [17], इसलिए डर है कि वे मुझे क़त्ल कर देंगे [18]।"
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के मिस्र छोड़ने से पहले एक इसराईली को बचाते हुए एक क़िब्ती (फ़िरऔनी) को मुक्का मारा था जिससे वह इत्तिफ़ाक़िया मर गया था। फ़िरऔन और उसके लोग इसे क़त्ल-ए-अमद क़रार देकर हज़रत मूसा के ख़ून के प्यासे थे।
हज़रत मूसा को अपनी जान का ख़ौफ़ नहीं था बल्कि यह फ़िक्र थी कि पैग़ाम-ए-हक़ पहुंचाने से पहले ही कहीं वे मुझे क़त्ल न कर दें और तब्लीग़ का काम अधूरा न रह जाए।
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