कुरान - 26:151 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

151
وَلَا تُطِيعُوٓاْ أَمۡرَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ

Transliteration: (Wa laa tutee'ooo amral musrifeen)

और हद से बढ़ जाने वाले मुफ़्सिदों के हुक्म पर न चलो [151]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 151 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 151

"और हद से बढ़ जाने वाले मुफ़्सिदों के हुक्म पर न चलो [151];"

[151] मुस्रिफ़ीन और मुफ़्सिद सरदारों की पैरवी से मुमानअत

हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ने अवाम को उन नौ शरीर और बदबख़्त सरदारों की पैरवी से सख़्ती से रोका जो क़ौम में कुफ़्र, जुर्म और गुनाह फैला रहे थे और लोगों को हक़ से रोकते थे।

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