कुरान - 26:152 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

152
ٱلَّذِينَ يُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا يُصۡلِحُونَ

Transliteration: (Allazeena yufsidoona fil ardi wa laa yuslihoon)

जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं और (अपनी व मुआशरे की) कोई इस्लाह नहीं करते [152]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 152 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 152

"जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं और कोई इस्लाह नहीं करते [152]।'"

[152] मुफ़्सिदों का किरदार: फ़साद और इस्लाह से दूरी

उन सरकशों का काम सिर्फ़ ज़मीन में बिगाड़, जुल्मो-सितम और नाफ़रमानी फैलाना था। उनके दिलों में न तो अपनी इस्लाह का कोई जज़्बा था और न ही मुआशरे की भलाई की कोई फ़िक्र।

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