कुरान - 26:154 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

154
مَآ أَنتَ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا فَأۡتِ بِـَٔايَةٍ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Transliteration: (Maaa anta illaa basharum mislunaa faati bi Aayatin in kunta minas saadiqeen)

तुम तो बस हमारे ही जैसे एक इंसान हो; पस कोई निशानी (मोजिज़ा) पेश करो अगर तुम सच्चों में से हो [154]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 154 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 154

"तुम तो बस हमारे जैसे इंसान हो; पस कोई निशानी पेश करो अगर तुम सच्चे हो [154]!'"

[154] इंसानी सूरत पर ऐतराज़ और मोजिज़े का मुतालबा

उन्होंने ऐतराज़ किया कि तुम भी तो हमारी तरह खाते-पीते और चलते-फिरते बशर हो, तुम्हें नबूवत की क्या ख़ासियत हासिल है? अगर तुम अपने दावे में सच्चे हो तो कोई ऐसा ख़ारिक़-ए-आदत मोजिज़ा दिखाओ जिसे देखकर हम मजबूर हो जाएं।

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