कुरान - 26:156 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

156
وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٖ فَيَأۡخُذَكُمۡ عَذَابُ يَوۡمٍ عَظِيمٖ

Transliteration: (Wa laa tamassoohaa bisooo'in fa yaakhuzakum 'azaabu Yawmin 'Azeem)

और इसे किसी भी तरह की तकलीफ़ (बुराई) न पहुंचाना, वर्ना तुम्हें एक बहुत बड़े दिन का अज़ाब आ पकड़ेगा [156]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 156 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 156

"और इसे किसी तरह की बुराई न पहुंचाना, वर्ना तुम्हें बहुत बड़े दिन का अज़ाब आ पकड़ेगा [156]!'"

[156] अल्लाह की ऊंटनी को तकलीफ़ पहुंचाने पर सख़्त तंबीह

हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ने क़ौम को वाज़ेह तौर पर ख़बरदार फ़रमा दिया कि यह ऊंटनी अल्लाह की क़ुदरत का मोजिज़ा है। इसे न तो ज़ख़्मी करना, न मारना और न ही इसके पानी पीने में कोई रुकावट डालना। अगर तुमने इसकी बेअदबी की या इसे कोई नुक़सान पहुंचाया तो तुम पर अल्लाह का वह हौलनाक अज़ाब नाज़िल होगा जो पूरी क़ौम को ख़ाक में मिला देगा।

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