कुरान - 26:158 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

158
فَأَخَذَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Fa akhazahumul 'azaab; inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)

पस अज़ाब ने उन्हें आ पकड़ा [158]; बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 158 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 158

"पस अज़ाब ने उन्हें आ पकड़ा [158]; बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे;"

[158] दिल दहला देने वाली चीख़ (सयहा) और ज़लज़ले से हलाकत

चौथे दिन सुबह के वक़्त आसमान से हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम की एक ऐसी शदीद चीख़ और कड़क गूंजी और नीचे से ज़मीन में ऐसा ख़ौफ़नाक ज़लज़ला आया कि उनके सीनों के अंदर दिल फट गए और वे अपने आलीशान तराशे हुए घरों में औंधे मुंह गिरे हुए ढेर हो गए। इतनी बड़ी निशानी देखकर भी बाक़ी इंसानों की अक्सरीयत ग़फ़लत में डूबी रही।

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