Transliteration: (Fa akhazahumul 'azaab; inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)
"पस अज़ाब ने उन्हें आ पकड़ा [158]; बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे;"
चौथे दिन सुबह के वक़्त आसमान से हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम की एक ऐसी शदीद चीख़ और कड़क गूंजी और नीचे से ज़मीन में ऐसा ख़ौफ़नाक ज़लज़ला आया कि उनके सीनों के अंदर दिल फट गए और वे अपने आलीशान तराशे हुए घरों में औंधे मुंह गिरे हुए ढेर हो गए। इतनी बड़ी निशानी देखकर भी बाक़ी इंसानों की अक्सरीयत ग़फ़लत में डूबी रही।
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