Transliteration: (Fa'aqaroohaa fa asbahoo naadimeen)
"मगर उन्होंने उसकी कूचें काट डालीं, फिर वे सुबह होते ही पछताने लगे [157];"
क़ौम के सबसे बड़े बदबख़्त 'क़ुदार बिन सालिफ़' ने अपने आठ मुफ़्सिद साथियों और पूरी क़ौम की रज़ामंदी से उस मोजिज़ाना ऊंटनी की टांगों की नसें काट कर उसे शहीद कर दिया। जब हज़रत सालेह ने फ़रमाया कि अब तीन दिन के अंदर तुम पर अज़ाब आ जाएगा, तो उनके चेहरों के रंग बदलने लगे (पहले दिन ज़र्द, दूसरे दिन सुर्ख़, तीसरे दिन सियाह) और वे अपनी तबाही को देखकर पछताने लगे, मगर वक़्त गुज़र जाने के बाद का पछतावा किसी काम न आया।
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