कुरान - 26:157 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

157
فَعَقَرُوهَا فَأَصۡبَحُواْ نَٰدِمِينَ

Transliteration: (Fa'aqaroohaa fa asbahoo naadimeen)

मगर उन्होंने उसकी कूचें काट डालीं (उसे हलाक कर दिया), फिर वे सुबह होते ही पछताने लगे [157]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 157 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 157

"मगर उन्होंने उसकी कूचें काट डालीं, फिर वे सुबह होते ही पछताने लगे [157];"

[157] क़ौम-ए-समूद की दरिंदगी और बेवक़्त नदामत

क़ौम के सबसे बड़े बदबख़्त 'क़ुदार बिन सालिफ़' ने अपने आठ मुफ़्सिद साथियों और पूरी क़ौम की रज़ामंदी से उस मोजिज़ाना ऊंटनी की टांगों की नसें काट कर उसे शहीद कर दिया। जब हज़रत सालेह ने फ़रमाया कि अब तीन दिन के अंदर तुम पर अज़ाब आ जाएगा, तो उनके चेहरों के रंग बदलने लगे (पहले दिन ज़र्द, दूसरे दिन सुर्ख़, तीसरे दिन सियाह) और वे अपनी तबाही को देखकर पछताने लगे, मगर वक़्त गुज़र जाने के बाद का पछतावा किसी काम न आया।

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