कुरान - 26:155 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

155
قَالَ هَٰذِهِۦ نَاقَةٞ لَّهَا شِرۡبٞ وَلَكُمۡ شِرۡبُ يَوۡمٖ مَّعۡلُومٖ

Transliteration: (Qaala haazihee naaqatul lahaa shirbunw walakum shirbu yawmim ma'loom)

(सालेह ने) फ़रमाया, 'यह (अल्लाह की) ऊंटनी है [155]; एक दिन इसके पानी पीने की बारी है और एक मुक़र्रर दिन तुम्हारे (मवेशियों के) पानी पीने की बारी है; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 155 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 155

"(सालेह ने) फ़रमाया, 'यह ऊंटनी है [155]; एक दिन इसके पानी पीने की बारी है और एक दिन तुम्हारे पानी पीने की बारी है;"

[155] नाक़ातुल्लाह (अल्लाह की ऊंटनी) और पानी की बारी

क़ौम-ए-समूद के मुतालबे पर हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ने दुआ फ़रमाई तो एक सख़्त चटान फटी और उसमें से एक निहायत अज़ीमुश्शान गाभिन ऊंटनी नमूदार हुई जिसने फ़ौरन बच्चा जना। हज़रत सालेह ने फ़रमाया कि यह अल्लाह की निशानी है। शहर के कुएं के पानी की तक़सीम मुक़र्रर कर दी गई: एक दिन पूरी तरह यह ऊंटनी पानी पिएगी और उस दिन लोग इसका दूध दुहेंगे जो तमाम शहर के लिए काफ़ी होगा, और अगले दिन लोग अपने मवेशियों को पानी पिलाएंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now