कुरान - 26:180 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

180
وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maaa as'alukum 'alaihi min ajrin in ajriya illaa 'alaa Rabbil 'aalameen)

और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [180]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 180 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 180

"और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता; मेरा अजर तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [180];"

[180] बे-रिया और मुकम्मल ख़ुलूस

हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम ने साफ़ फ़रमा दिया कि मेरी दावत महज़ रज़ाए इलाही के लिए है, मुझे तुम्हारी किसी दौलत या नफ़ा की ज़रूरत नहीं।

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