कुरान - 26:181 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

181
۞أَوۡفُواْ ٱلۡكَيۡلَ وَلَا تَكُونُواْ مِنَ ٱلۡمُخۡسِرِينَ

Transliteration: (Awful kaila wa laa takoonoo minal mukhsireen)

नाप पूरी तरह भरो और घाटा (नुक़सान) देने वालों में से न बनो [181]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 181 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 181

"नाप पूरी तरह भरो और घाटा देने वालों में से न बनो [181];"

[181] नाप-तौल में ईमानदारी और हक़-तलफ़ी की मुमानअत

क़ौम-ए-शुऐब की सबसे बड़ी समाजी बुराई यह थी कि जब वे लोगों से कोई चीज़ ख़रीदते तो नाप-तौल में ज़्यादा लेते, और जब दूसरों को बेचते तो कम नाप कर धोखा देते थे। हज़रत शुऐब ने उन्हें हुक्म दिया कि पूरा पैमाना भरो और हरामख़ोरी व डाकेबाज़ी छोड़ दो।

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