Transliteration: (Awful kaila wa laa takoonoo minal mukhsireen)
"नाप पूरी तरह भरो और घाटा देने वालों में से न बनो [181];"
क़ौम-ए-शुऐब की सबसे बड़ी समाजी बुराई यह थी कि जब वे लोगों से कोई चीज़ ख़रीदते तो नाप-तौल में ज़्यादा लेते, और जब दूसरों को बेचते तो कम नाप कर धोखा देते थे। हज़रत शुऐब ने उन्हें हुक्म दिया कि पूरा पैमाना भरो और हरामख़ोरी व डाकेबाज़ी छोड़ दो।
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