कुरान - 26:183 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

183
وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

Transliteration: (Wa laa tabkhasun naasa ashyaaa 'ahum wa laa ta'saw fil ardi mufsideen)

और लोगों को उनकी चीज़ों में कमी न दो [181], और ज़मीन में फ़साद फैलाते न फिरो [183]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 183 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 183

"और लोगों को उनकी चीज़ों में कमी न दो [181], और ज़मीन में फ़साद फैलाते न फिरो [183];"

[181] इंसानों के हुक़ूक़ और मुआशी दयानतदारी

किसी की मेहनत, मज़दूरी या सामान की क़ीमत में कमी करना और धोखे से उसका माल हड़प कर लेना सख़्त हराम है।

[183] ज़मीन पर फ़साद और डकैती की मज़म्मत

वे रास्तों पर बैठ कर मुसाफ़िरों और ताजिरों को लूटते थे। हज़रत शुऐब ने फ़रमाया कि ज़मीन में ज़ुल्म, फ़साद और बदअमनी न फैलाओ।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now