Transliteration: (Wa laa tabkhasun naasa ashyaaa 'ahum wa laa ta'saw fil ardi mufsideen)
"और लोगों को उनकी चीज़ों में कमी न दो [181], और ज़मीन में फ़साद फैलाते न फिरो [183];"
किसी की मेहनत, मज़दूरी या सामान की क़ीमत में कमी करना और धोखे से उसका माल हड़प कर लेना सख़्त हराम है।
वे रास्तों पर बैठ कर मुसाफ़िरों और ताजिरों को लूटते थे। हज़रत शुऐब ने फ़रमाया कि ज़मीन में ज़ुल्म, फ़साद और बदअमनी न फैलाओ।
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