कुरान - 26:187 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

187
فَأَسۡقِطۡ عَلَيۡنَا كِسَفٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Transliteration: (Fa asqit 'alainaa kisafam minas samaaa'i in kunta minas saadiqeen)

पस तुम हम पर आसमान का कोई टुकड़ा गिरा दो अगर तुम सच्चों में से हो [187]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 187 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 187

"पस तुम हम पर आसमान का कोई टुकड़ा गिरा दो अगर तुम सच्चे हो [187]!'"

[187] अज़ाब-ए-आसमानी का गुस्ताख़ाना मुतालबा

क़ौम-ए-शुऐब ने तकब्बुर में आकर अज़ाब को चुनौती दी कि अगर तुम अपने दावे में सच्चे हो तो आसमान से हम पर अज़ाब का कोई टुकड़ा (किस्फ़) गिरा कर हमें हलाक करके दिखाओ।

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