Transliteration: (Fakazzaboohu fa akhazahum 'azaabu Yawmiz zullah; innahoo kaana 'azaaba Yawmin 'Azeem)
"पस उन्होंने उन्हें झुठला दिया, तो उन्हें सायबान वाले दिन के अज़ाब ने आ पकड़ा [189]; बेशक वह बहुत बड़े दिन का अज़ाब था [190]!"
अल्लाह तआला ने उन पर सात दिन तक ऐसी शदीद धूप और दमघोंटू गर्मी मुसल्लत की कि पानी और कुएं भी खौलने लगे। फिर जंगल के ऊपर एक काला घना बादल छाया जिसमें ठंडी हवा महसूस हुई। सब लोग गर्मी से राहत पाने के लिए उस बादल के साए के नीचे जमा हो गए। जब सब इकट्ठे हो गए तो उस बादल से आग और अंगारों की मूसलाधार बारिश बरसी और ज़मीन में ज़लज़ला आया जिससे वे सब जल-भुन कर राख का ढेर बन गए।
यह दिन उनके लिए इंतहाई हौलनाक, रुसवाकुन और दर्दनाक साबित हुआ जिसमें उनका नामो-निशान मिटा दिया गया।
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