कुरान - 26:189 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

189
فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمۡ عَذَابُ يَوۡمِ ٱلظُّلَّةِۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٍ

Transliteration: (Fakazzaboohu fa akhazahum 'azaabu Yawmiz zullah; innahoo kaana 'azaaba Yawmin 'Azeem)

पस उन्होंने उन्हें झुठला दिया, तो उन्हें सायबान वाले दिन के अज़ाब (अज़ाबु यौमिज़-ज़ुल्ला) ने आ पकड़ा [189]; बेशक वह एक बहुत बड़े हौलनाक दिन का अज़ाब था [190]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 189 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 189

"पस उन्होंने उन्हें झुठला दिया, तो उन्हें सायबान वाले दिन के अज़ाब ने आ पकड़ा [189]; बेशक वह बहुत बड़े दिन का अज़ाब था [190]!"

[189] 'अज़ाबु यौमिज़-ज़ुल्ला' (बादल के सायबान का आग बरसाने वाला अज़ाब)

अल्लाह तआला ने उन पर सात दिन तक ऐसी शदीद धूप और दमघोंटू गर्मी मुसल्लत की कि पानी और कुएं भी खौलने लगे। फिर जंगल के ऊपर एक काला घना बादल छाया जिसमें ठंडी हवा महसूस हुई। सब लोग गर्मी से राहत पाने के लिए उस बादल के साए के नीचे जमा हो गए। जब सब इकट्ठे हो गए तो उस बादल से आग और अंगारों की मूसलाधार बारिश बरसी और ज़मीन में ज़लज़ला आया जिससे वे सब जल-भुन कर राख का ढेर बन गए।

[190] अज़ीमुश्शान अज़ाब का दिन

यह दिन उनके लिए इंतहाई हौलनाक, रुसवाकुन और दर्दनाक साबित हुआ जिसमें उनका नामो-निशान मिटा दिया गया।

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