कुरान - 26:190 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

190
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)

बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [190]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 190 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 190

"बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [190];"

[190] इबरत और नसीहत का पैग़ाम

क़ौम-ए-शुऐब के इस हौलनाक अंजाम में आने वाली नस्लों के लिए बड़ी इबरत है कि बद-दियानती, ज़ुल्म और नबियों की नाफ़रमानी हमेशा क़ौमों की हलाकत का सबब बनती है।

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