कुरान - 26:198 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

198
وَلَوۡ نَزَّلۡنَٰهُ عَلَىٰ بَعۡضِ ٱلۡأَعۡجَمِينَ

Transliteration: (Wa law nazzalnaahu 'alaa ba'dil a'jameen)

और अगर हम इसे किसी ग़ैर-अरबी (अजमी) पर नाज़िल फ़रमाते [197]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 198 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 198

"और अगर हम इसे किसी ग़ैर-अरबी पर नाज़िल फ़रमाते [197];"

[197] अरब और अजम की हुदूद

अरब पांच ख़ित्तों पर मुश्तमिल है: हिजाज़, इराक़, नज्द, बहरैन और यमन। इसके अलावा सारी दुनिया को 'अजम' कहा जाता है। अगर यह क़ुरआन किसी अजमी (ग़ैर-अरब) पर नाज़िल होता जिसे अरबी ज़बान बिल्कुल न आती हो,

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