Transliteration: (Kazaalika salaknaahu fee quloobil mujrimeen)
"इसी तरह हमने इस झुठलाने को मुजरिमों के दिलों में पैवस्त कर दिया है [199];"
जब इंसान लगातार हक़ को ठुकराता है और गुनाह व तकब्बुर पर इसरार करता है, तो अल्लाह की सुन्नत के मुताबिक़ उसके दिल पर ऐसी कालिख और सख़्ती छा जाती है कि हिदायत की कोई रौशनी उसके अंदर दाख़िल नहीं हो पाती।
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