कुरान - 26:199 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

199
فَقَرَأَهُۥ عَلَيۡهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ مُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Faqara ahoo 'alaihim maa kaanoo bihee mu'mineen)

फिर वह इसे उनके सामने पढ़कर सुनाता, तब भी वे उस पर ईमान लाने वाले न थे [198]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 199 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 199

"फिर वह इसे उनके सामने पढ़कर सुनाता, तब भी वे ईमान लाने वाले न थे [198]!"

[198] मुन्किरीन की बेजा ज़िद और हठधर्मी

हुज़ूर ﷺ 'उम्मी' हैं यानी आपने किसी इंसान से पढ़ना-लिखना नहीं सीखा, इसके बावजूद आपने ऐसा बेमिसाल फ़सीह कलाम पेश फ़रमाया जिसका जवाब अरब के बड़े-बड़े शोअरा न दे सके। अगर किसी ठेठ अजमी की ज़बान से भी यह अरबी कलाम जारी होता, तब भी ये मुशरिक ईमान न लाते बल्कि उसे जादू कह कर टाल देते। यह साबित करता है कि उनका इंकार दलील की कमी की वजह से नहीं बल्कि महज़ ज़िद और अना की बिना पर था।

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