Transliteration: (Laa yu'minoona bihee hattaa yarawul 'azaabal aleem)
"वे इस पर ईमान नहीं लाएंगे जब तक कि दर्दनाक अज़ाब न देख लें [200];"
मुशरिकों का यह हाल है कि वे ज़िन्दगी भर हक़ का मज़ाक़ उड़ाएंगे और सिर्फ़ उस वक़्त कलमा पढ़ने की कोशिश करेंगे जब अज़ाब-ए-इलाही उनके सरों पर आ धमकेगा। मगर मौत और अज़ाब को सामने देखकर लाया गया ईमान अल्लाह की बारगाह में क़बूल नहीं होता, क्योंकि ईमान 'बिल-ग़ैब' ही मोतबर है।
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