कुरान - 26:71 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
قَالُواْ نَعۡبُدُ أَصۡنَامٗا فَنَظَلُّ لَهَا عَٰكِفِينَ

Transliteration: (Qaaloo na'budu asnaaman fanazallu lahaa 'aakifeen)

वे कहने लगे, 'हम बुतों की इबादत करते हैं और हम मुसलसल उन्हीं के मुजाविर (आसनों पर जमे) बने रहते हैं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 71

"वे कहने लगे, 'हम बुतों की इबादत करते हैं और मुसलसल उन्हीं के मुजाविर बने रहते हैं।'"

क़ौम-ए-इब्राहीम ने बे-झिझक इक़रार किया कि हम पत्थरों के बुतों को पूजते हैं और दिन-रात उनकी ख़िदमत और इबादत में लगे रहते हैं। यह उनकी अंधी जहालत का इज़हार था।

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