कुरान - 26:80 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

80
وَإِذَا مَرِضۡتُ فَهُوَ يَشۡفِينِ

Transliteration: (Wa izaa maridtu fahuwa yashfeen)

और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे शिफ़ा अता फ़रमाता है [86]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 80 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 80

"और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे शिफ़ा अता फ़रमाता है [86];"

[86] आदाब-ए-दुआ और शिफ़ा की निस्बत अल्लाह की तरफ़

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के अदब का कमाल देखिए कि बीमारी की निस्बत अपनी तरफ़ की ('जब मैं बीमार होता हूँ') ताकि अल्लाह की तरफ़ ऐब की निस्बत न हो, और शिफ़ा की निस्बत ख़ालिस अल्लाह की तरफ़ की ('वही मुझे शिफ़ा देता है')। दुनिया की तमाम दवाइयाँ और डॉक्टर ज़रिया हैं, अस्ल शिफ़ा बख़्शने वाला सिर्फ़ शाफ़ी-ए-मुतलक़ (अल्लाह) है।

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