कुरान - 26:82 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
وَٱلَّذِيٓ أَطۡمَعُ أَن يَغۡفِرَ لِي خَطِيٓـَٔتِي يَوۡمَ ٱلدِّينِ

Transliteration: (Wallazeee atma'u ai yaghfira lee khateee' atee Yawmad Deen)

और जिससे मैं पूरी उम्मीद रखता हूँ कि वह जज़ा (क़ियामत) के दिन मेरी ख़ताओं को बख़्श देगा [87]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 82

"और जिससे उम्मीद रखता हूँ कि जज़ा के दिन मेरी ख़ताओं को बख़्श देगा [87]!"

[87] नबियों की आजिज़ी और तौबा की तालीम

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम मासूम अनिल्-ख़ता (गुनाहों से पाक) पैग़म्बर हैं, लेकिन अपनी बन्दगी और आजिज़ी का इज़हार फ़रमाते हुए और उम्मत को तालीम देने के लिए फ़रमाया कि मुझे पूरी उम्मीद है कि क़ियामत के दिन मेरा रब अपने फ़ज़्ल से मेरी ख़ताओं को मुआफ़ फ़रमाएगा।

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